Advertisement

Nibandh Kise Kahate Hain | परिभाषा व प्रकार | निबंध किसे कहते हैं ?

इस लेख में हम निबंध के बारे में विस्तृत रूप से जानेंगे। Nibandh Kise Kahate Hain निबंध किसे कहते हैं, बोर्ड की परीक्षाओं में ये सवाल अक्षर पूछा जाता रहा है। निबंध लिखने का एक अलग ही स्वरूप और तरीका होता है यह सामान्य लेखन की तरह नहीं लिखा जाता है। इस लेख में हम निबंध किसे कहते हैं (Nibandh Kise Kahate hain), निबंध की परिभाषा एवं इसके प्रकार, निबंध लेखन का तरीका व इसके जनक सभी विन्दु के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। 

Nibandh Kise Kahate Hain
Nibandh Kise Kahate Hain, Nibandh ki Paribhasha, Nibandh Ke Prakar, Nibandh Lekhan Ka Tarika, Nibandh Kise Kahate Hain Paribhasha Sahit Udaaharan Likhiye, What is Essay in Hindi

Nibandh Kise Kahate Hain (निबंध किसे कहते हैं ?)

चलिए इस लेख में जानते हैं Nibandh Kise Kahate hain निबंध किसे कहते हैं। गद्य की नवीन विधाओं में निबंध सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथा विकसित विधा है। इसके महत्व को प्रतिपादित करते हुए ही आलोचकों ने निबंध को गद्य की कसौटी कहां है। पहले निबंध का प्रयोग दार्शनिक तथा बौद्धिक अभिव्यक्ति के लिए होता था, किंतु आधुनिक हिंदी निबंध संस्कृत के निबंध से पूर्णतया अलग है तथा अंग्रेजी के एस्से (Essay) से अधिक निकट है। 

आज मानवीय भाषा की अभिव्यंजना शक्ति का सबसे अधिक प्रसार इस विधा में हो रहा है। इसके विषय क्षेत्र की सीमा मानव जीवन के समान ही अनंत तक विस्तृत है। यद्यपि इसमें बुद्धि तत्व की प्रधानता होती है, तथापि इसका संबंध हृदय तत्व से भी अछूता नहीं रहता है।

निबंध में निबंधकार का व्यक्तित्व पाठक के सम्मुख सजीव रूप में उपस्थित होता है। या निबंधकार केस मानस का उस समय का चित्र होता है, जिस समय वह किसी विषय से प्रभावित होता है । इसमें लेखक किसी भी विषय कार्यक्रम संपूर्ण विवेचन, विश्लेषण, परीक्षण, व्याख्या तथा मूल्यांकन करता है। वह विषय का निर्वाह अपनी इच्छा अनुसार तथा अपने देश दृष्टिकोण के अनुरूप करता है, जिसमें वह सब प्रकार से स्वतंत्रता रहता है। 

निबंध की परिभाषा एवं प्रकार लिखिए 

निबंध की परिभाषा - किसी विषय पर सुसम्बद्ध रूप से लिखी गई रचना को निबंध कहते हैं। यह चार प्रकार के होते हैं (1) विचारात्मक निबंध (2) भावात्मक निबंध (3) वर्णनात्मक निबंध (4) विवरणात्मक निबंध । निबंध आत्म परक होता है तथा इसमें आत्मीयता और भावमयता के साथ-साथ विचारों की तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति होती है। 

लघु आकार की एक ऐसी रचना है, जिसमें सामान्य गद्य की अपेक्षा रोचक सजीव तथा अर्थपूर्ण गद्य का विकास होता है । उसकी शैली में विशेष कलात्मक पूर्णता होती है । इसका अंश जीवन की भाँति ही व्यापक तथा विस्तृत है,  तथापि इसमें सीमा तथा विशिष्ट कला के अनुरूप ही विषय का चयन किया जाता है। यह अपने आपने पूर्ण होता है । विषय तथा शैली के अनुसार इसके निम्नलिखित चार भेद होते हैं।

निबंध का जनक कौन है ?

माईकेल डि मान्तेन 1533 - 1592 (Michel de Montaigne) को निबंध का जनक कहा जाता है। ये फ्रांसीसी पुर्नजागरण के सबसे प्रभावशाली लेखक माने जाते थे। इन्होने ने ही निबंध को एक साहित्य को एक विधा के रूप में प्रचलित किया था। 

निबंध के प्रकार - Nibandh Ke Prakar

Nibandh Kise Kahate Hain

मुख्यतः निबंध के चार प्रकार होते हैं -

1. विचारात्मक निबंध

2. भावात्मक निबंध

3. वर्णनात्मक निबंध

4. विवरणात्मक निबंध

विचारात्मक निबंध (विचारत्मक निबंध किसे कहते हैं ?)

इस प्रकार के निबंधों में बुद्धि तत्व की प्रधानता होती है, जिसके परिणाम स्वरूप उनमें विचारों की भारी सघनता देखने को मिलती है। इनमें तर्कपूर्ण विवेचन, विश्लेषण तथा गवेषणा का आधिपत्य होता है। इनके विषय भी अधिकांशत दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, शास्त्रीय और विवेचनात्मक आदि होते हैं । 

इनके लेखक के लिए गहन चिंतन-मनन तथा अध्ययन की आवश्यकता होती है । प्रस्तुत संकलन में रामचंद्र शुक्लकृत 'मित्रता' तथा डॉ राजेंद्र प्रसाद कृत 'भारतीय संस्कृति' इसी प्रकार के निबंध है।

भावात्मक निबंध (भावात्मक निबंध किसे कहते हैं ?)

इन निबंधों में हृदय तत्व अथवा रागतमकता का सुष्टु समन्वय होता है। इनका लक्ष्य पाठक की बुद्धि की अपेक्षा उसके हृदय को प्रभावित करना होता है। इनकी भाषा सरल, सुंदर, सुकोमल, ललित तथा मधुर होती है। इनमें भावों को उत्कर्ष प्रदान करने के लिए कल्पना तथा अलंकारों का भी समुचित प्रयोग किया जाता है। इनका वाक्य विन्यास सरल तथा शैली कवित्यपूर्ण होती है। रामवृक्ष बेनीपुरी का 'नीव की ईट' और वियोगी हरि का 'विश्व मंदिर' इस प्रकार के निबंधों के श्रेष्ठ उदाहरण है।

वर्णनात्मक निबंध (वर्णनात्मक निबंध किसे कहते हैं ?)

इस निबंधों में किसी भी वर्णनीय वस्तु, स्थान, व्यक्ति, दृश्य आदि का निरीक्षण के आधार पर आकर्षक सरस तथा रमणीय रूप में वर्णन होता है। इनकी शैली दो प्रकार की होती है। एक में यथार्थ वर्णन तथा दूसरी में अंलकृत वर्णन होता है। 
यथार्थ वर्णन सूक्ष्म निरीक्षण तथा निजी अनुभूति के आधार पर होता है, जबकि अलंकृत वर्णन में कल्पना का प्रयोग होता है। इन निबंधों में चरित्रात्मका, रोचकता, कौतुहल तथा मानसिक प्रत्यक्षीकरण कराने की भरपूर क्षमता होती है। इनका शैली भी प्रायः सरल, सुबोध तथा सरस होती है। 

विवरणात्मक निबंध (विवरणात्मक निबंध किसे कहते हैं ?)

इन निबंध में प्रायः ऐतिहासिक तथा सामाजिक घटनाओं, स्थानों, दृश्यों, यात्राओं तथा जीवन के अन्य विविध क्रिया-कलापों का विवरण दिया जाता है। इनमे आख्यानात्मक का पुट रहता है तथा विषयवस्तु से सम्बंधित प्रत्येक तथ्य का सुसम्बुद्ध विवरण रोचक, हृदयग्राही तथा क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाता है।  इनकी शैली सरल, आकर्षक, भावानुकूल, व्यावहारिक तथा चित्रात्मक होती है। प्रस्तुत संकलन में भगवतशरण उपाध्यायकृत 'अंजना' निबंध इसका उत्तम उदाहरण है। 

निबंध का स्वरूप - (Essay Format)

निबंध लिखते समय हमे कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है। निबंध में हमे कुछ भाग को क्रमबद्ध तरीके से लिखना होता है। 

निबंध के तीन प्रमुख स्वरूप (भाग) होते हैं -

1. प्रस्तावना (भूमिका) - यह निबंध का आरम्भिक अंग होता है। इस भाग में निबंध लिखे जाने वाले विचारो तथा तथ्यों की व्यवस्था का वर्णन होता है। 

2. मध्य भाग - यह निबंध का मुख्य भाग होता है। इसमें निबंध के विषय का अच्छी प्रकार से प्रतिपादन किया जाता है। जो विचार प्रस्तावना में सूक्ष्म रूप में दर्शाए गए होते हैं, उनका विस्तार निबंध के मध्य भाग में होता है। मध्य भाग में प्रस्तावना में दिए गए जानकारी को पूर्णतः विस्तृत रूप से बताया और समझाया जाता है। इस भाग में विचारों की क्रमबद्धता का ध्यान रखना भी आवश्यक होता है क्योंकि यह भाग भूमिका तथा उपसंहार, दोनों को मिलाने वाला होता है।

3. उपसंहार - निबंध में मध्य भाग में प्रस्तुत किए गए विचारों पर लेखक की स्वयं की विचारधारा को इस भाग में संक्षेप में स्पष्ट किया जाता है। यह वर्णन किये हुए विषय का सार होता है।  

निबंध लेखन का तरीका 

1. दिए गए निबंध में शीर्षक का अध्ययन निबन्ध लेखन का सर्वप्रथम चरण है। सर्वप्रथम शीर्षक के बारे में गंभीरता पूर्वक अध्ययन करना चाहिए। 

2. बिन्दुओं को ध्यान पूर्वक समझना, परीक्षा में पूछे गए निबन्ध से सम्बन्धित संकेत बिन्दुओं का ध्यानपूर्वक अध्ययन करके उनका उचित प्रयोग निबन्ध में करना चाहिए।

3. निबंध लिखते समय शब्द सीमा परीक्षा में पूछे गए निबन्ध लेखन का महत्त्वपूर्ण चरण शब्द सीमा (500 से 800 ) शब्द में लिखना चाहिए। निबन्ध न ज़्यादा छोटा या ज़्यादा बड़ा नहीं होना चाहिए।

4. निबंध लिखने से पहले निबंध के विषय पर व्यापक जानकारी होनी चाहिए। बिना जानकारी के हम हम विषय पर विस्तार रूप से व्याख्या और शब्दों को व्यवस्थित रूप से नहीं लिख पाएंगे। 

5. निबंध लिखते समय मुहावरे और लोकक्तियाँ का भी प्रयोग करना चाहिए। 

6. निबंध लेखन में उपसंहार अथवा निष्कर्ष निबन्ध का अन्तिम चरण उपसंहार होता है। निबन्ध का अन्त में उपयुक्त और प्रभावी सार द्वारा किया जाना चाहिए।

निबंध लिखते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें 

निबंध किसी भी वस्तु, स्थान, घटना, यात्रा, समस्या आदि किसी भी विषय को लेकर लिखा जा सकता है। 

निबंध लिखते समय निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए -

1.  जिस भी विषय पर निबंध लिखना हो, उसका पर्याप्त जानकारी होना आवश्यक है। बिना उस विषय के जानकारी या अधूरे ज्ञान के साथ आप निबंध नहीं लिख सकते हैं। 

2. निबंध में विचारों का क्रम व्यवस्तिथ होना चाहिए। प्रत्येक बात अलग - अलग अनुच्छेदों में लिखी जानी चाहिए। 

3. निबंध - रचना में थोड़े शब्दों में अधिक अर्थ प्रकट करने वाले शब्दों और वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए। 

4. निबंध लिखने से पहले उसकी रूपरेखा पर अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए। 

5. निबंध लिखते समय पुस्तकीय ज्ञान साथ-साथ अपने व्यक्तिगत जानकारी भी अपने ढंग से लिखी जाती हैं। 

Related Post :

हिंदी भाषा का महत्व पर परिभाषा 


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ